पूजा पाठ के नियम | Puja Path Ke Niyam

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Puja Path Ke Niyam: हिंदू धर्म में पूजा का बहुत महत्व है। कहा जाता है कि नियमित रूप से पूजा करने से देवी-देवताओं की कृपा मिलती है, लेकिन भगवान की पूजा के संबंध में कई नियम बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है देवी-देवताओं की आरती। प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान के पूरा होने के बाद संबंधित देवता की आरती की जाती है। ऐसा माना जाता है कि अगर आरती नहीं की जाती है तो पूजा अधूरी रहती है। हिंदू धर्म में इष्ट देव को प्रसन्न करने के लिए पूजा के अंत में आरती गाकर उनकी स्तुति की जाती है। आरती करने के लिए दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है। मान्यता है कि इससे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं। अगर आप भी पूजा के दौरान दीप जलाकर आरती करते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अगर दीया या दीया जलाते समय कुछ बातों का ध्यान न रखा जाए तो घर से सुख-शांति दूर हो सकती है। तो आइए जानते हैं दीया जलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Puja Path Ke Niyam –

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार पूजा के दौरान देवताओं के सामने कभी भी खंडित दीया भूलकर भी न जलाएं। क्योंकि टूटा हुआ दीपक धार्मिक कार्यों में अशुभ माना जाता है।

पूजा करते समय शुद्ध और सही दीपक का ही प्रयोग करें। यदि आप मिट्टी के तेल का दीपक जला रहे हैं, तो एक बार फिर से उपयोग किए गए दीपक का उपयोग न करें। इसके अलावा अगर आप धातु का दीपक इस्तेमाल करते हैं तो पूजा से पहले उसे अच्छी तरह साफ कर लें।

कहा जाता है कि पूजा के दौरान घी का दीपक बाईं ओर और तेल का दीपक दाईं ओर भगवान के सामने रखना चाहिए। वहीं अगर आप घी का दीपक जला रहे हैं तो सफेद रुई का इस्तेमाल करें और अगर तेल का दीपक जला रहे हैं तो लाल धागे की बत्ती का इस्तेमाल करें।

मान्यताओं के अनुसार जब भी दीपक जलाएं तो जल पात्र के पास घी का दीपक रखें। इससे आपके घर में धन की वृद्धि होती है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी दूर होती हैं।

ऐसा कहा जाता है कि शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक को जमीन पर नहीं रखना चाहिए। चावल या अन्य चीजों के ऊपर रखना चाहिए। साथ ही दीया जलाने के तुरंत बाद नहीं बुझना चाहिए, इसलिए इसे हवा से बचाकर जलाएं।

धर्म शास्त्रों के अनुसार कभी भी एक दीपक से दूसरे दीपक में दीपक नहीं जलाना चाहिए। हमेशा अलग से दीपक जलाएं। साथ ही दीपक लगाने की सही दिशा पूर्व मानी जाती है। मान्यता के अनुसार दीपक को पश्चिम दिशा में रखने से फालतू खर्च बढ़ता है, जबकि दक्षिण दिशा में पितरों के लिए दीपक जलाया जाता है।

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