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चाणक्य नीति: चाणक्य नीति की बाते जो मनुष्य को दिखाती है सही राह

Chanakya Niti In Hindi:  एक महान विद्वान थे, आचार्य चाणक्य । अगर व्यक्ति चाणक्य की इन नीतियों का अपने जीवन में पालन करे तो। उस व्यक्ति को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में न सिर्फ समाज कल्याण की बाते है। अपितु चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने अपने श्लोको में ऐसी-ऐसी स्थिति के बारे में वर्णन किया है। जब यह परिस्थिति मनुष्य के सामने आ जाती है। तो वह बिलकुल अकेला पड़ जाता है। अपने भी उसका साथ छोड़ देते है।



कई शास्त्र आचार्य चाणक्य के द्वारा लिखित है। आचार्य चाणक्य के द्वारा लिखित नीति शास्त्र की बातें आज भी बहुत लोकप्रपिय हैं। मनुष्य के  जीवन को सरल एवं सुगम नीति शास्त्र में बताई गई बातें बनाती हैं। आचार्य चाणक्य द्वारा नीति शास्त्र में बताई गई बातें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। जीवन के हर पहलु से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों का आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में जिक्र किया है। यदि अपने जीवन में आचार्य चाणक्य की शिक्षाओं उतार लिया जाए तो एक संतुष्ट और सफल जीवन व्यक्ति व्यतीत कर सकता है।



अपने जीवन में हर तरह की परिस्थितियों का सामना आचार्य चाणक्य ने किया। पर कभी हार न मानी व आत्मविश्वास बनाए रखा। उन्होंने अपने शत्रु घनानंद का अपनी बुद्धिमत्ता और नीतियों के बल पर नाश किया। व शासक के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य को स्थापित किया।

आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान व एक योग्य शिक्षक भी थे। आचार्य चाणक्य का संबंध विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से था। आचार्य चाणक्य ने विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और चाणक्य ने शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की।



  1. जो मनुष्य को सिखाती है जिन्हे की राह, जब अपने भी छोड़ देते है साथ – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

श्लोक

त्यजन्ति मित्राणि धनैर्विहीनं पुत्राश्च दाराश्च सुहृज्जनाश्च। 
तमर्शवन्तं पुनराश्रयन्ति अर्थो हि लोके मनुषस्य बन्धु:।।

इस श्लोक का मतलब है की व्यक्ति के पास जब धन नहीं होता। तो उस व्यकित को उसका मित्र, स्त्री, पुत्र, भाई-बंधु, नौकर चाकर सभी छोड़ देते है। वही अगर उसके पास धन सम्पति आ जाए। तो सभी वापस उसके साथ खड़े नजर आते है। इस संसार में मनुष्य का बंधु धन ही है। आचार्य चाणक्य ने का धन के इर्द-गिर्द सारे संबंधों का ताना-बाना है। इसमें किसी प्रकार का कोई आश्चर्य नहीं।

अन्यायोपार्जितं वित्तं दशवर्षाणि तिष्ठति।
प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं तद् विनश्यति।।

अन्याय करके कमाया गया धन मनुष्य या व्यक्ति के पास ज्यादा से ज्यादा 10 वर्ष तक टिकता है। 11 व वर्ष शुरू होते ही वह धन ब्याज और मूल सहित नष्ट हो जाता है। मतलब मनुष्य को कभी भी गलत व अन्याय के मार्गो से धन नहीं कमाना चाहिए।



दुर्जनस्य च सर्पस्य वरं सर्पो न दुर्जनः । 
सर्पो दंशति काले तु दुर्जनस्तु पदे पदे ।।

दुर्जन व्यक्ति से ज्यादा सांप बेहतर होता है। क्योकि जब सांप को स्वयं पर खतरा महसूस होता है। वह तभी डसता है। पर दुर्जन प्रवृति का मनुष्य तो प्रत्येक समय डसने के लिए अवसर की तलाश करता है। आचार्य चाणक्य के मुताबिक कभी भी दुर्जन मनुष्य किसी का भला नहीं कर सकता है।

प्रलये भिन्नमार्यादा भविंत किल सागर:
सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलेयशपि न साधव:।

मतबल जब प्रलय आता है। तब अपनी सीमाओं को समुद्र भी तोड़ देता है। पर प्रलय के समान भयंकर आपत्ति एवं विपत्ति में भी सज्जन व्यक्ति अपनी सीमाओं को कभी नहीं लांगता। सज्जन व्यक्ति तो धैर्यवान होते हैं। सज्जन व्यक्ति अपने संयम से ही सफल होते हैं।



2.  मांसाहार से 10 गुना ज्यादा ताकतवर है यह चीज, अच्छी सेहत के लिए करें सेवन – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य के अनुसार जीवन में आगे बढ़ने और लक्ष्य को प्राप्त करने के स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। इसलिए आचार्य कहते है की भोजन पर मनुष्य को विशेष ध्यान देना चाहिए।

अन्नाद्दशगुणं पिष्टं पिष्टाद्दशगुणं पयः 
पयसोऽष्टगुणं मांसं मांसाद्दशगुणं घृतम्

सर्वप्रथम इस श्लोक में आचार्य चाणक्य बताते हैं कि अनाज व्यक्ति के जीवन के लिए बहुत पुष्टिवर्धक होता है। पीसा हुआ अनाज मतलब आट सबसे ज्यादा ताकतवर होता है। क्योकि आटे से बनी रोटी खाने के बाद पूरे दिन व्यक्ति ऊर्जावान बना रहता है। पाचन तंत्र रोटी खाने से सही बना रहता है। पेट से जुड़ी समस्या नहीं रहती। सेहत अच्छी रहती है।

नीति शास्त्र तदानुसार आटे से भी ज्यादा ताकत दूध देता है। दूध आटे से दस गुना ज्यादा शक्ति देता है। इसे संपूर्ण आहार भी कहा गया है। प्रत्येक दिन दूध पीने से शरीर पुष्ट व आवश्यक पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति होती है। इससे हड्डियां मजबूत रहती हैं।

मांसाहार को दूध से आठ गुणा ज्यादा ताकतवर कहा गया है। पर इससे भी 10 गुणा ज्यादा ताकतवर घी है। हर रोज शुद्ध घी का सेवन करने वाले व्यक्ति की हड्डियां मजबूतरहती है। इसलिए अपने खाने में प्रतिदिन घी व्यक्ति को मिल करना चाहिए।

3. यदि शत्रु पर पाना चाहते है विजय, तो याद रखे इन बातो को – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

अपने शत्रुओं अगर परास्त करना चाहते हैं। तो आपको आचार्य चाणक्य के नीति के कुछ विशेष सूत्रों को याद रखना चाहिए। आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक में शत्रु नीति के बारे में बताया है। चाणक्य श्लोक में शत्रुओं को परास्त करने विधि बताते हैं।



श्लोक

अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम्।
आत्मतुल्यबलं शत्रु: विनयेन बलेन वा।।

यदि आपसे शत्रु अधिक बलशाली है। तो उसे परास्त उसके अनुकूल आचरण कर किया जा सकता है। यदि दुष्ट स्वभाव का शत्रु है। तो उसे विपरीत चलकर हरा सकते है। और यदि आपके समान बलवान वाला शत्रु है। तो बलपूर्वक या विनय (अनुरोध) द्वारा हराया जा सकता है।

आचार्य चाणक्य के चाणक्य नीति के अनुसार शत्रु जब आपसे अधिक शक्तिशाली हो। तो आपको उस वक्त छिप जाना चाहिए। और सही समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए। स्वयं को उसके बाद शक्ति को बढ़ाने के विषय में कार्य करना चाहिए। शत्रु पर वार शुभचिंतकों को एकत्रित करने के बाद करना चाहिए। जिससे अपने शत्रु को आप आसानी से पराजित कर पाएंगे। चाणक्य नीति के अनुसार जब शत्रु शक्तिशाली हो तो यह शांति के साथ काम लेने का वक्त होता है।



शत्रु हर सफल व्यक्ति के होते हैं। कुछ शत्रुओं के बारे में तो हमे पता भी नहीं होता। और कुछ अज्ञात शत्रु। यह शत्रु आपको सीधे नुकसान नहीं पहुंचाते है। बल्कि छिपकर वार करते हैं। और ऐसे शत्रु बहुत अधिक घातक होते हैं। ऐसे शत्रुओं का पता लगाने के लिए बहुत सतर्कता की जरूरत होती है। जब अचानक वार हो तब घबराने की बजाय शत्रु की हर चाल का डटकर सामान करना चाहिए।

आचार्य चाणक्य के अनुसार शत्रु की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखना चाहिए। शत्रु को पराजित उसकी कमजोरियों का पता लगाकर किया जा सकता है। इसलिए शत्रु की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर व सही समय आने पर पराजित करें। शत्रु की कमजोरी पहचाने, कमजोर कड़ी का उपयोग कर शत्रु को पराजित करना चाहिए।

4.यह तीन चीजें मनुष्य को कभी हारने नहीं देती, रखें हमेशा ध्यान – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

ऐसी तीन बातों के बारे में उन्होंने बताया है। इन बातो को अगर ध्यान में रखा जाए व आगे बढ़ा जाए तो व्यक्ति कभी नहीं हारता है।

हारे हुए की सलाह

आचार्य चाणक्य के अनुसार बहुत ध्यान से व्यक्ति को हारे हुए की सलाह सुनना और समझना चाहिए। अपने क्षेत्र का हारे हुए व्यक्ति को अच्छा अनुभव होता है। उस व्यक्ति ने जो गलतियां की है। उनको ध्यान में रखकर उनसे सबक लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। एक हार हुआ व्यक्ति बारीक से बारीक बात आपको बता सकता है। जो कोई और अन्य आपको नहीं बता सकता।



जीते हुए सफल व्यक्ति का अनुभव

आचार्य चाणक्य कहते है की सफल व्यक्ति के अनुभव को ध्यान से सुनना व समझना चाहिए। यह जीवन में आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अगर आपको जीवन में सफल होना है तो प्रेरणा लेना बहुत जरूरी है। इसलिए सफल लोगों का अनुभव जानना समझना चाहिए। और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

स्वयं का दिमाग

जीवन में आगे बढ़ने, सफल होने और सही निर्णय लेने के लिए किसी व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। स्वयं का दिमाग। किसी भी क्षेत्र में । एक व्यक्ति अपनी बुद्धि के बल पर सफलता प्राप्त करने की क्षमता रखता है। अपने जीवन में सफल होने के लिए कौन सी बातों को का प्रयोग करना चाहिए। किन बातों से दुरी बनाई रखनी चाहिए। यह निर्णय हमारे दिमाग के द्वारा ही लिया जा सकता है।

5. सेहतमंद रहने के लिए इन बातों का करें पालन – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य ने स्वास्थ्य के विषय में भी कुछ विशेष बातें बताई हैं। जो इस प्रकार हैं-



1. अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्।
भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम्।।

मतलब भोजन न पचने पर पिया हुआ पानी औषिधि के समान है। पानी भोजन पचने के करीब आधे से एक घंटे बाद पीना शरीर के लिए लाभदायक माना गया है। थोड़ा पानी भोजन के बीच में पीना अमृत के समान माना गया है। और वही पानी का सेवन भोजन के तुरंत बाद विष के समान होता है।

2. चूर्ण दश गुणो अन्न ते, ता दश गुण पय जान।
पय से अठगुण मांस ते तेहि दशगुण घृत मान॥

मतलब पीसा हुआ अन्न खड़े अन्न की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होता है। पिसे अन्न से दूध 10 गुना ज्यादा फायदेमंद होता है। व दूध से 10 गुना मांस और मांस से 10 गुना पौष्टिक घी होता है।

आचार्य चाणक्य के मुताबिक सप्ताह में एकबार पूरे शरीर की मालिश च्छी सेहत और निरोगी काया के लिए करनी चाहिए। शरीर की मालिश रोम छिद्र खुल जाते हैं। अंदर की गंदगी बाहर हो जाती है। मालिश करने के बाद स्नान जरूर ही करना चाहिए।



6. यह चार काम करने के बाद जरूर करें स्नान – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

तैलाभ्यङ्गे चिताधूमे मैथुने क्षौरकर्मणि.
तावद् भवति चाण्डालो यावत् स्नानं न चाचरेत्

आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक में बताया की व्यक्ति को स्नान किन कार्यों को करने के बाद करना जरूरी है।

 शरीर की तेल मालिश करने के बाद

आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को शरीर की तेल मालिश करने के पश्चात स्नान जरूर करना चाहिए। शरीर पर तेल मालिश करने के पश्चात रक्त संचार तेज व रोम छिद्रों में से पसीना निकलता है। इसलिए स्नान तेल मालिश के बाद अवश्य करें।



शवयात्रा या श्मशान से आने के बाद

चाणक्य के अनुसार शवयात्रा या शमशान से लौटने के पश्चात हमे स्नान कर लेना चाहिए। क्योंकि जब किसी की मौत होती है। तो कई तरह के कीटाणु उसके शरीर पर पनपने लगते हैं। और जब कोई शव के आसपास व उसे छूता है। तो वे कीटाणु हमारे शरीर और कपड़ों में हवा के माध्यम से लग जाते हैं , इसलिए शवयात्रा या शमशान से आने के पश्चात स्नान व कपड़े धोना बहुत ही जरूरी है।

काम-क्रीड़ा करने के बाद

चाणक्य के चाणक्य नीति के अनुसार किसी स्त्री-पुरुष को प्रेम प्रसंग क्रिया करने के बाद स्नान अवश्य करना चाहिए। शरीर काम क्रीड़ा के बाद अपवित्र हो जाता है। व बिना स्नान के कोई भी पूजा पाठ का कार्य नहीं किया जा सकता।

बाल कटवाने के बाद स्नान करना है आवश्यक

बाल कटवाने के बाद व्यक्ति को स्नान अवश्य करना चाहिए। क्योंकि छोटे छोटे बाल शरीर पर बाल कटवाने के बाद चिपक जाते हैं। इन बालों को हटाने के लिए स्नान करना आवश्यक होता है।

7. इन चीजों से मनुष्यो को कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य ने बताया है। जिससे कभी भी में मनुष्य को संतुष्ट नहीं होना चाहिए। तो चलिए जानते हैं ऐसी चीजों के बारे में



दूसरों की भलाई करने में

आचार्य चाणक्य के अनुसार कभी भी भलाई के कार्य करते हुए मनुष्य को संतुष्ट नहीं होना चाहिए। किसी की भलाई का अवसर जब भी प्राप्त हो। हमेशा तत्पर रहना चाहिए। जो व्यक्ति सदैव दूसरों की भलाई व समाज हित केकार्य करता है। वह हमेशा सम्मान का पात्र बना रहता है।

अभ्यास करने में

आचार्य चाणक्य के अनुसार कभी भी अभ्यास करने में मनुष्य को संतुष्ट नहीं होना चाहिए। जितना अभ्यास व्यक्ति करता है। वह व्यक्ति अपने कार्य और विषय में उतना ही पारंगत होता है। किसी भी कार्य में सफलता के लिए उससे संबंधित विषय पर पकड़ होना बहुत जरूरी होता है। इसलिए अभ्यास लगातार करते रहना चाहिए।



ईश्वर का नाम लेने में

आचार्य चाणक्य के नीति शास्त्र के अनुसार ईश्वर का स्मरण करने में मनुष्य को कभी संतुष्ट नहीं होना चाहिए। इससे मन को परम शांति प्राप्त होती है। ईश्वर का स्मरण किसी भी परिस्थिति में मनुष्य को मजबूती और धैर्य प्रदान करता है।

8. बच्चे को सही राह दिखाने के लिए आयु के अनुसार करें व्यवहार – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य के अनुसार शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों का एक गुणवान व्यक्तित्व के निर्माण में होना बहुत आवश्यक होता है। शिक्षा का बिना संस्कारों के कोई महत्व नहीं रह जाता है। बालपन से ही एक बालक को अच्छे संस्कार दिए जाते हैं।

माता पिता की बच्चे को अच्छे संस्कार देने में भूमिका सबसे अहम होती है। माता पिता को बच्चों से किसी भी तरह का व्यवहार करते हुए खास ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। बच्चों से व्यवहार करने से संबंधित महत्वपूर्ण बातें चाणक्य नीति में शेयर की गयी है। अगर चाणक्य नीति में बताई गयी बातो को ध्यान में रखा जाए तो सही तरीके से बच्चों को समझाया जा सकता है। अच्छी सीख दी जा सकती ही।



पांच वर्ष लौं लालिये, दस लौं ताड़न देइ,
सुतहीं सोलह बरस में, मित्र सरसि गनि लेइ

इस दोहे के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने कहा की किस आयु में माता-पिता को बच्चे के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए। दोहे में कहा गया की बच्चे को खूब लाड़ प्यार 5 वर्ष की आयु तक करना चाहिए। क्योंकि बालक इस आयु में अबोध होता है। बालक को क्या सही है और क्या गलत इसका भान नहीं होता है। इस उम्र में की गयी गलती जानबूझकर नहीं की जाती है।

जब बालक पांच वर्ष का हो

आचार्य चाणक्य ने कहा की जब बालक 5 वर्ष की उम्र का हो जाए तो उसे गलती करने पर डांटा जा सकता है। क्योंकि वह चीजों को इस समय से समझना शुरू कर देता है। इसलिए इस उम्र में जरूरत पड़ने पर प्यार के साथ बच्चे को डांटना भी चाहिए।



10 से 15 साल वर्ष के बालक से व्यवहार

बच्चा जब 10 वर्ष से लेकर 15 वर्ष का हो जाए तो बच्चे के साथ थोड़ी सख्ती की जा सकती है। क्योंकि बच्चे इस उम्र में हठ करने लगते हैं। अगर कोई बच्चा गलत तरह का व्यवहार व हठ करता है। तो थोड़ा सख्त व्यवहार उसके साथ किया जा सकता है। पर बच्चों से व्यवहार करते समय भाषा को माता पिता को बहुत ही मर्यादित रखना चाहिए।

16 वर्ष की आयु में बच्चे से कैसा हो व्यवहार

चाणक्य नीति के अनुसार 16 वर्ष के बच्चे के साथ मारने या डांटने के बजाए उससे दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि इस उम्र के बच्चे में बहुत से बदलाव होने लगते हैं। यह आयु बहुत ही नाजुक होती है। इस उम्र में बच्चे के साथ दोस्त की तरह व्यवहार कर उसे उसकी गलतियों का अहसास करवाना चाहिए।



9. यदि महामारी व युद्ध के समय रखेंगे इन बातों का ख्याल, तो आसानी से गुजर जाएगा बुरा वक्त – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य न केवल कुशाग्र बुद्धि के धनी थे बल्कि श्रेष्ठ विद्वान व एक योग्य शिक्षक थे। आचार्य चाणक्य ने जीवन का एक बड़ा भाग शिक्षा प्रदान करते हुए बिताया है। इन्होने शिक्षा विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से प्राप्त की साथ ही विद्यार्थियों को यंहा आचार्य रहते हुए  शिक्षा भी प्रदान की।

चाणक्य राजनीति और कूटनीति में कुशल थे। नीतिशास्त्र में चाणक्य ने अपने ज्ञान और अनुभव को पिरोया है। महामारी व युद्ध जैसे हालातों के लिए भी आचार्य चाणक्य ने नीतिशास्त्र में महत्वपूर्ण बातें बताई है। महामारी के समय में अगर अपने और व्यवहार के सही रखा जाए तो कठिन  मुश्किल हालात का भी सामना आसानी से कर सकते है। तो फिर जानते है क्या कहती है चाणक्य नीति।



महामारी की स्थिति होने पर

नीति शास्त्र के अनुसार व्यक्ति को अपना आपा महामारी जैसा संकट आने पर नहीं खोना चाहिए। महामारी के वक्त परेशान होने की बजाए सतर्कता व सावधानी से काम करना चाहिए। भावुक होने की बजाए सूझ-बूझ से कोई भी फैसला लेना चाहिए। नकारात्मक विचारों को मन से दूर व सदैव सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए। साथ ही इसके लिए अन्य को भी प्रेरित करना चाहिए।

युद्ध की स्थिति में

चाणक्य नीति कहती है की युद्ध की स्थिति में व्यक्ति को अपनी हिम्मत और हौसला नहीं खोना चाहिए। हिम्मत और हौसला सदैव बनाए रखना चाहिए। युद्ध की स्थिति में समस्या से भागने के बजाए समस्याओ से निकलने की युक्ति के बारे में विचार करना चाहिए। और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में प्रक्षेपित करना चाहिए।



जब शत्रु हो अधिक शक्तिशाली

चाणक्य नीति कहती है की अगर आपका शत्रु अधिक बलशाली है। तो उस वक्त जोश न दिखाकर होश से काम लेना चाहिए। ऐसे वक्त में शत्रु को सामने से ललकारना मुशीबते कड़ी कर सकता है। यदि ऐसे समय में पीछे हटना पड़े तो हट जाना चाहिए। और अपने शत्रु का योजनाबद्ध तरीके से सभी को एकत्रित करने के बाद शत्रु का सामना करना चाहिए।



10. ऐसे लोगों से हमेशा रहें दूर, धन, समय और सम्मान की बर्बादी – Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति

मूर्ख को उपदेश देना

चाणक्य नीति के मुताबिक मूर्ख को उपदेश देना बिलकुल व्यर्थ है। इसलिए उन्हें उपदेश नहीं देना चाहिए। वे अपने कुतर्कों के आगे सही बात को भी सही नहीं मानते हैं। जिससे बहुमूल्य समय ज्ञानी लोगों का नष्ट होता है। इसलिए मूर्खों को उपदेश व साथ रहने से बचे।

ऐसे लोगों का न करना चाहिए भरण-पोषण

वैसे तो किसी का भरण पोषण बहुत ही पुण्य का काम होता है। लेकिन नीतिशास्त्र के अनुसार जो कर्कशा और चरित्रहीन है। जो हमेशा ही बुरे कर्मों में लिप्त है। ऐसे व्यक्तियों का भरण पोषण कभी भी नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों का भरण पोषण व साथ रहने से अपशय मिलता है। धन व सम्मान को भी हानि व ठेश पहुँचती है



बेकार में दुखी रहने वाले व्यक्ति 

हर बात पर कुछ लोग दुखी होते रहते हैं। अकारण ही सभी सुखों के होने पर भी दुख व्यक्त करते रहते हैं। उनसे दूरी बनाकर रखे। ऐसे लोगों के साथ रहने से नकारात्मक विचार मनुष्य में स्वयं आने लगते हैं। जिससे इसका जीवन में बुरा असर पड़ता है। ऐसे लोग न तो स्वयं आगे बढ़ते है बल्कि दूसरे को भी आगे नहीं बढ़ने देते हैं।

यह भी पढ़ें- चाणक्य नीति: जानिए सबसे अच्छा मित्र, सबसे बड़ा शत्रु और सबसे बड़ा धन

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