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दिवाली 2021: दीवाली पर लक्ष्मी पूजा में इसलिए चढ़ाया जाता है खील बतासे का प्रसाद

हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। दिवाली का त्योहार मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं। एक किवदंती के अनुसार कहा जाता है कि इसी दिन भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे। इसलिए उनकी प्रजा ने घी के दीपक जलाकर खुशी मनाई। यही कारण है कि दिवाली की रात घी के दीये जलाए जाते हैं। इसके अलावा एक धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। जिससे आपका घर साल भर धन और अन्न से भरा रहता है। इसलिए दिवाली को धन और समृद्धि का त्योहार कहा जाता है। इस वर्ष दीपावली का पर्व 04 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। और मुख्य भोग प्रसाद के रूप में उन्हें खिल (धान का लावा) और बतासे जरूर चढ़ाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी को खिल और मीठे बताशे या मीठे खिलौने क्यों चढ़ाए जाते हैं। जानिए इसके पीछे की वजह।

खील-बताशे लक्ष्मी पूजा में क्यों चढ़ाए जाते

खील (जिसे धान का लावा भी कहा जाता है) चावल से तैयार की जाती है। लक्ष्मी जी को खील चढ़ाने का संबंध प्राकृतिक कारणों से है। दिवाली के समय धान की फसल पकने के बाद तैयार हो जाती है। इसलिए धन और अन्न की देवी लक्ष्मी जी का आभार व्यक्त करने के लिए धान का पहला भोग लक्ष्मी जी को दिया जाता है। हिंदू धर्म में देवी-देवताओं को कुछ मीठा जरूर चढ़ाया जाता है। इसलिए खीलो के साथ मीठे खिलौने या बताशे का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा इस दिन नए चावल का हलवा भी बनाकर मां लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है। लक्ष्मी जी को केसर की खीर बहुत पसंद है। इसलिए दिवाली के शुभ अवसर पर उन्हें खीर का भोग अवश्य लगाना चाहिए। इससे लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।

ये हैं खील बतासे चढ़ाने का ज्योतिषीय कारण

ज्योतिष शास्त्र में चावल को शुक्र का अन्न माना गया है। और शुक्र को धन और वैभव का कारक ग्रह माना गया है। शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी और शुक्र को समर्पित है। मां लक्ष्मी भी धन और समृद्धि की देवी हैं। और उनकी पूजा से शुक्र मजबूत होता है। इसके साथ ही चावल को एक शुद्ध पदार्थ माना जाता है। इसलिए दिवाली पर चावल की खील चढ़ाने का ज्योतिषीय महत्व भी माना जाता है।

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