चैत्र अष्टमी 2022: कल है नवरात्रि की अष्टमी तिथि, इस दिन कैसे करें मां दुर्गा की पूजा? जानिए विधि और मंत्र

Chaitra Navratri Durga Ashtami 2022: इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 02 अप्रैल से हो चुकी है। जो 10 अप्रैल तक चलेगी। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा बेहद खास मानी जाती है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (Durga Ashtami को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि अष्टमी तिथि को सच्चे मन से मां महागौरी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां महागौरी को ममता की मूर्ति कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मां महागौरी की पूजा करने से राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। इस साल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि कब है और इस दिन देवी दुर्गा के आठवें रूप की पूजा कैसे करें, आइए जानते हैं…

चैत्र नवरात्रि 2022 अष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त

इस बार अष्टमी तिथि 09 अप्रैल को है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 08 अप्रैल की रात 11.05 बजे से शुरू हो रही है। साथ ही इसका समापन 09 अप्रैल की देर रात 1:23 बजे होगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी।

दुर्गाष्टमी 2022 पूजा विधि

इस दिन मां दुर्गा के आठवें रूप मां महागौरी की कृपा पाने के लिए सबसे पहले लकड़ी की चौकी या मंदिर में महागौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। फिर चौकी पर एक सफेद कपड़ा बिछाएं और उस पर महागौरी यंत्र रखें और यंत्र की स्थापना करें। इसके बाद फूल लेकर मां का ध्यान करें। अब मां की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और उन्हें फल, फूल, नैवेद्य आदि चढ़ाएं और देवी मां की आरती करें।

महा अष्टमी पूजा का महत्व

विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मां महागौरी की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि महागौरी की पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। साथ ही पारिवारिक कलह भी समाप्त हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए ही देवी महागौरी की पूजा की थी।

कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि में अष्टमी के दिन कन्या की पूजा करना उत्तम माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि में कन्याओं की पूजा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

कन्या पूजन विधि

नवरात्रि में, महा अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजा की जाती है। 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्याओ के साथ-साथ एक लांगुरिया (छोटा लड़का) को पूड़ी, हलवा, चने की सब्जी आदि खिलाई जाती है। इसके बाद कन्याओं को तिलक करके, हाथों में मौली बांधकर, उपहार-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

मंत्र-

श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:.
महागौरी शुभं दद्यान्त्र महादेव प्रमोददो.
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.
ओम महागौरिये: नम:.

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