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दशहरा 2021: रावण से लक्ष्मण ने लिया ज्ञान, जानिए क्या हैं वो अमूल्य शिक्षा

दशहरा 2021: आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न रावण के पुतले को जलाकर मनाते हैं। इस बार दशहरा का पर्व शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021 को मनाया जाएगा। रावण को लेकर लोगों के मन में एक नकारात्मक पहलू है। लेकिन रावण अत्यंत ज्ञानी और विलक्षण पंडित था। रावण एकमात्र ऐसा विद्वान था जिसमें त्रिकाल दर्शन की क्षमता थी। भगवान राम ने स्वयं रावण की वीरता और ज्ञान की प्रशंसा की थी। क्योंकि वह भी रावण के ज्ञान से अच्छी तरह वाकिफ थे। जब रावण युद्ध के मैदान में मरणासन्न अवस्था में था। तब भगवान राम ने स्वयं लक्ष्मण को रावण से ज्ञान लेने का आदेश दिया था। जिसके बाद लक्ष्मण ने दशानन से ज्ञान लिया। रावण द्वारा दी गई शिक्षा आज के जीवन में भी सार्थक सिद्ध होती है। जानिए क्या हैं वो अनमोल सबक।

जब रावण युद्ध के मैदान में अपनी मृत्यु शय्या पर था। तब भगवान राम ने लक्ष्मण को रावण से ज्ञान प्राप्त करने का आदेश दिया। लक्ष्मण अपने भाई की आज्ञा के अनुसार दशानन के पास गए और खड़े हो गए। लेकिन कुछ समय बाद वापस आकर कहा कि रावण ने उनसे कुछ नहीं कहा, लक्ष्मण की बात सुनकर भगवान राम को पूरी कहानी समझ में आ गई। फिर उन्होंने अपने अनुज (छोटे भाई) को समझाया कि रावण एक महान विद्वान है , और जब हम किसी से ज्ञान लेते हैं। तो हम उसे सम्मान देते हैं। इसलिए इस बार सिर पर नहीं रावण के चरणों में खड़े होकर विनम्रतापूर्वक अनुरोध करके सिख लेना। इसके बाद लक्ष्मण जी ने भगवान राम की बात मानी और विनम्रतापूर्वक रावण से ज्ञान प्राप्त किया। फिर रावण ने अपने ज्ञान और जीवन के अनुभव के आधार पर लक्ष्मण को बहुमूल्य बातें बताईं।

अच्छे कामों में देरी न करें

पहली महत्वपूर्ण बात बताते हुए रावण ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी शुभ कार्य करने में देरी नहीं करनी चाहिए। शुभ कार्यों को यथाशीघ्र करना चाहिए। इसी तरह यदि आप अशुभ कर्मों से अवगत हैं तो जितना हो सके उससे बचने का प्रयास करें। तब रावण ने इस तरह बताया कि वह समय रहते भगवान राम को नहीं पहचान सके। जो स्वयं श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। अपनी शरण में जाने में देरी के कारण आज वह युद्ध के मैदान में मरणासन्न अवस्था में है।

किसी को राज मत बताना

दशानन ने एक और महत्वपूर्ण बात बताते हुए लक्ष्मण से कहा कि यदि उनके जीवन में कोई रहस्य है। तो उसे किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए। आज वह विभीषण को अपनी मृत्यु का रहस्य बताने के कारण मृत्यु शय्या पर पड़ा है। शास्त्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभीषण ने ही राम से कहा था कि रावण की मृत्यु तभी संभव है जब वह उसकी नाभि पर प्रहार करे।

प्रतिद्वंद्वी को कम मत समझो

तीसरी महत्वपूर्ण बात बताते हुए रावण ने कहा कि आपका विरोधी चाहे कितना भी कमजोर क्यों न हो। उसे कभी भी उसका तिरस्कार करने की गलती नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अपने जीवन में भी यही गलती की और राम को साधारण और कमजोर माना।

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