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गरुड़ पुराण: जाने भूत-प्रेत के विषय में क्या कहता है गरुड़ पुराण

Garud Puran: भूत-प्रेत और स्वर्ग-नरक की कहानियां हम सभी ने बचपन से ही सुनी हैं। लेकिन अगर आप वाकई उनके बारे में जानना चाहते हैं तो आपको गरुड़ पुराण (Garud Puran) पढ़नी चाहिए। इन बातों का वर्णन इस महापुराण में किया गया है।

जीवन जीते हुए हम इसका अनुभव करते हैं। लेकिन मृत्यु के समय व्यक्ति को कैसा लगता है। क्या वास्तव में यमराज या उनके दूत जैसी कोई चीज होती है, इसके अलावा स्वर्ग-नरक या भूत-प्रेत जैसी कोई चीज होती है। इसके बारे में तभी पता चलता है जब इंसान खुद मौत की दहलीज पर पहुंच जाता है।

लेकिन अगर आप जिंदा रहते हुए इनके बारे में जानना चाहते हैं तो आपको गरुड़ पुराण पढ़ना चाहिए। इस महापुराण में जीवन की सभी नीतियों के अलावा मृत्यु के समय और उसके बाद की स्थितियों और स्वर्ग-नरक और पितृलोक के बारे में बहुत कुछ बताया गया है। साथ ही जीवात्मा, प्रेतात्मा और सूक्ष्मआत्मा में भी अंतर बताया गया है। यहां जानिए गरुड़ पुराण भूतों की धारणा के बारे में क्या कहता है।

मृत्यु के बाद ऐसे लोग बन जाते हैं भूत

गरुड़ पुराण के अनुसार सभी मृत भूत और प्रेत नहीं बनते हैं। जो व्यक्ति भूख, प्यास, कामवासना, क्रोध, द्वेष, लोभ, वासना आदि से विरक्त होकर मर जाता है या दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या आदि के कारण मर जाता है। , उसे मृत्यु के बाद भूत बनना पड़ता है। ये आत्माएं असन्तुष्ट होकर मर जाती हैं। इसलिए इन्हें शांत और तृप्त करने के लिए शास्त्रों में तर्पण और श्राद्ध के नियम बताए गए हैं। यदि ये आत्माएं श्राद्ध और तर्पण से संतुष्ट नहीं होती हैं। तो वे परिवार के सदस्यों को किसी न किसी तरह से परेशान करने का प्रयास करती हैं।

होती हैं भूत-प्रेतों की तमाम जातियां

गरुड़ पुराण के अनुसार जब आत्मा भौतिक शरीर में निवास करती है, तब उसे जीवात्मा कहा जाता है। जब सूक्ष्मतम शरीर में प्रवेश करता है। तो उसे सूक्ष्मात्मा कहा जाता है। और जब वह वासना और कामनामय शरीर में रहती है। तो उसे प्रेतात्मा कहा जाता है। भूतों और आत्माओं की शक्तियाँ अपार हैं। और इनकी तमाम जातियां भी होती हैं। जिन्हें भूत, प्रेत, दानव, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल आदि कहा जाता है।

सभी आत्माएं भूत नहीं बनतीं

गरुड़ पुराण में 84 लाख योनियों का उल्लेख है। जिसमें कीट-पतंग, पशु-पक्षी, वृक्ष और मनुष्य आदि शामिल हैं। इन सभी योनियों की आत्मा मृत्यु के बाद अदृश्य भूतों और प्रेत में चली जाती है। लेकिन वे सभी अदृश्य हैं। लेकिन बलवान नहीं होती हैं। अदृश्य होना और बलवान होना आत्मा की क्रिया और गति पर निर्भर करता है। वहीं मृत्यु के बाद कुछ पुण्य आत्माएं भूत या प्रेत योनि में नहीं जाती हैं। वह फिर से गर्भधारण कर लेती हैं।

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