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Hal Shashti 2022: कब है हल षष्ठी? जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और धार्मिक महत्व

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Hal Shashti 2022 Shubh Muhurat: भारत विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहारों का घर है। भारत में हिंदू रक्षा बंधन या श्रावण पूर्णिमा के ठीक छह दिन बाद हर छठ या हल षष्ठी व्रत रखते हैं। यह पारंपरिक हिंदू कैलेंडर में भाद्रपद महीने के दौरान कृष्ण पक्ष की षष्ठी (Hal Shashti) के दिन मनाया जाता है। पारंपरिक हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण त्योहार, हल षष्ठी (Hal Shashti) श्री कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम की जयंती पर मनाया जाता है।

भगवान बलराम के जन्म को मनाने वाले त्योहार के भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नाम हैं। राजस्थान में इसे चंद्र षष्ठी के नाम से जाना जाता है, जबकि गुजरात में इसे रंधन छठ के नाम से जाना जाता है और ब्रज क्षेत्र में इसे बलदेव छठ कहा जाता है। माता देवकी और वासुदेव की सातवीं संतान भगवान बलराम को भी अधिशेष के अवतार के रूप में पूजा जाता है, जिस नाग पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। हलछठ को हलषष्ठी, ललई छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष हलषष्ठी (Hal Shashth) का पर्व 17 अगस्त मंगलवार को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के भाई दाऊ की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत करने से पुण्य संतान को कष्टों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और पूजा विधि…

हलषष्ठी शुभ मुहूर्त

कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त, मंगलवार रात 08:19 से
कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि समाप्त: 17 अगस्त, बुधवार, 09:21 मिनट
उदयतिथि के आधार पर 18 अगस्त को हल षष्ठी मनाई जाएगी।

हलषष्ठी का महत्व

भगवान बलराम को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे हल्युध, बलदेव और बलभद्र। चूंकि मूसल और फावड़ा भगवान बलराम के मुख्य उपकरण माने जाते थे, इसलिए कृषक समुदाय से संबंधित हिंदू भक्त इस दिन भरपूर फसल के लिए इन उपकरणों की पूजा करते हैं। वहीं महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए और संतान की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

हलषष्ठी पूजा विधि

  • हलषष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और श्रीकृष्ण और बलराम जी की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर लगाएं।
  • इसके बाद बलराम की प्रतिमा पर चंदन का तिलक करें और पुष्प अर्पित करें।
    बलराम का ध्यान करने के बाद उन्हें प्रणाम करें और आरती के साथ भगवान विष्णु की पूजा पूरी करें।
  • हलषष्ठीके दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम के शस्त्र की पूजा करने का भी विधान है।
  • संभव हो तो प्रतीकात्मक हल बनाकर उसकी पूजा करें।

हलषष्ठी व्रत के नियम

  • हलछठ या हलषष्ठी के दिन बलराम जी के शस्त्र हल की पूजा की जाती है, इसलिए इस दिन हल से जुती वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • हलाष्टी के दिन महिलाएं तालाब में उगे फल या चावल खाकर व्रत रखती हैं।
  • हलछठ के दिन व्रत के दौरान गाय के दूध या दूध से बनी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।

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