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हरतालिका तीज व्रत कथा, पौराणिक महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Hartalika Teej Vrat Katha 2021: हरतालिका दो शब्दों से मिलकर बना है हरत और आलिका, हरत का मतलब होता है अपहरण और आलिका अर्थात् सहेली। एक पौराणिक कथा इस संबंध में मिलती है। जिसके मुताबिक पार्वती जी का अपहरण करके उनकी सखियां उन्हें जंगल में ले गई थी। ताकि उनके पिता पार्वती जी का विवाह इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से नहीं कर दें। पार्वती जी ने अपनी सखियों की सलाह से भगवान शिव की घने वन में एक गुफा में अराधना की। पार्वती जी ने भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजा की साथ ही रातभर जागरण किया। भगवान शिव ने पार्वती जी के तप से खुश होकर पत्नी के रूप में माँ पार्वती को स्वीकार कर लिया था।

हरतालिका तीज व्रत का पौराणिक महत्व

Hartalika Teej Vrat Katha: भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में हरतालिका तीज व्रत मनाया जाता है। एक पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया था। माता पार्वती ने भूखे-प्यासे रहकर हिमालय पर गंगा नदी के तट पर तपस्या की। उनके पिता हिमालय माता पार्वती की यह स्थिति देखकप बेहद दुखी हुए। भगवान विष्णु की ओर से एक दिन महर्षि नारद पार्वती जी की शादी का प्रस्ताव लेकर आए। पर इस बात का जब माता पार्वती को पता चला तो वे विलाप करने लगी।

उन्होंने एक सखी के पूछने पर बताया कि वे पति के रूप में भगवान शिव को पाने लिए कठोर तप कर रही हैं। अपनी सखी की सलाह पर इसके बाद माँ पार्वती वन में चली गई। और भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन हो गई। इस दौरान माता पार्वती ने शिवलिंग का निर्माण भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हस्त नक्षत्र में रेत से किया। और शिव शंकर की आराधना में मग्न होकर रात को जागरण किया। भगवान शिव ने माँ पार्वती के कठोर तप को देखकर उन्हें दर्शन दिए। और पार्वती जी की इच्छा मुताबिक उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से कुंवारी कन्या और सौभाग्यवती स्त्रियां अच्छे पति की कामना और पति की दीर्घायु के लिए हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का व्रत रखती हैं। और माता पार्वती व भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेती हैं।

हरतालिका तीज व्रत पूजा विधि

माता पार्वती और भगवान शंकर की हरतालिका तीज पर विधि-विधान से पूजा की जाती है। हरतालिका तीज व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है..

  1. प्रदोषकाल में हरतालिका तीज किया जाता है। सूर्यास्त के पश्चात के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। यह दिन व रात के मिलन का वक्त होता है।
  2. हरतालिका पूजन (Hartalika Puja) के लिए माँ पार्वती, भगवान भोलेनाथ व भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं।
  3. फूलों से पूजा स्थल को सजाकर एक चौकी रखें व केले के पत्ते उस चौकी पर रखकर भगवान शिव, माँ पार्वती और गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
  4. उसके पश्चात देवताओं का आह्वान करते हुए षोडशोपचार पूजन भगवान शिव शंकर, माँ पार्वती व भगवान गणेश का करें।
  5. सुहाग की समस्त वस्तु सुहाग की पिटारी में रख माँ पार्वती को अर्पित करना हरतालिका तीज की मुख्य परंपरा है।
  6. धोती व अंगोछा महादेव को चढ़ाया जाता है। ब्राह्मणी और ब्राह्मण को यह सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के पश्चात दान देना चाहिए।
  7. इस तरह पूजन के पश्चात कथा सुनें व रात्रि जागरण करें। आरती के पश्चात सुबह माँ पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं व भोग ककड़ी-हलवे का लगाकर व्रत खोलें।

शुभ मुहूर्त

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरम्भ 8 सितंबर 2021 बुधवार दिन को देर रात 02:33 मिनट पर हो रहा है। 09 सितंबर 2021 को रात 12:18 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो रही है। उदया तिथि ऐसे में 09 सितंबर 2021 को प्राप्त है। इसलिए 09 सितंबर 2021 दिन गुरुवार को हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का व्रत रखा जाएगा।  इस दिन पूजा के लिए दो मुहूर्त हैं। एक सुबह के वक्त व दूसरा प्रदोष काल में सूर्यास्त के पश्चात ।

सुबह का मुहूर्त:  आपको 02 घंटे 28 मिनट का समय हरतालिका तीज की प्रात: पूजा के लिए मिलेगा। इस दिन प्रात: 05:55 मिनट से सुबह 08:23 मिनट के बीच पूजा करना उत्तम है।
प्रदोष पूजा मुहूर्त:  शाम को 06:16 मिनट से रात 08:36 मिनट तक हरतालिका तीज की प्रदोष पूजा के लिए मुहूर्त है। 02 घंटे 20 मिनट का समय इसमें आपको मिलेगा।

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