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Jagannath Ji Ki Aarti: आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि तक प्रतिदिन पढ़ें जगन्नाथ भगवान जी की आरती

Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi: 01 जुलाई 2022, शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध पुरी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली गई। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। इस रथ यात्रा का सभी को बेसब्री से इंतजार रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ नगर का भ्रमण करते हुए अपनी मौसी के घर आराम करने जाते हैं। रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के भक्त बड़ी संख्या में एकत्रित होकर रथ खींचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो कोई भी इस रथ यात्रा में भाग लेकर इस रथ को खींचता है उसे सौ यज्ञ करने के बराबर पुण्य मिलता है। यह रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल एकादशी को समाप्त होती है। ऐसा भक्त जो सच्चे मन से भगवान जगन्नाथ की पूजा करता है, उस पर भगवान की कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है। भगवान जगन्नाथ की पूजा में उनकी आरती का विशेष महत्व है। ऐसे में भगवान जगन्नाथ की पूजा करने के बाद उनकी आरती अवश्य करनी चाहिए।

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Jagannath Rath Yatra 2022

जगन्नाथ जी की आरती हिंदी में | Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi

आरती श्री जगन्नाथ,
आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,

मंगलकारी नाथ आपादा हरि,
कंचन को धुप दीप ज्योत जगमगी,

अगर कपूर बाटी भव से धारी,
आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,

आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,
घर घरन बजता बाजे बंसुरी,

घर घरन बजता बाजे बंसुरी,
झांझ या मृदंग बाजे,ताल खनजरी,

आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,

निरखत मुखारविंद परसोत चरनारविन्द आपादा हरि,
जगन्नाथ स्वामी के अताको चढे वेद की धुवानी,

जगन्नाथ स्वामी के भोग लागो बैकुंठपुरी,
आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,

इंद्र दमन सिंह गजे रोहिणी खड़ी,
इंद्र दमन सिंह गजे रोहिणी खड़ी,

मार्कंडेय स्व गंगा आनंद भरि,
आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,

आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,
सरनार मुनि द्वारे तदे ब्रह्म वेद भानी,

सरनार मुनि द्वारे तदे ब्रह्म वेद भानी,
धन धन ओह सुर स्वामी आनंद गढ़ी,

आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,

आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,
मंगलकारी नाथ आपादा हरि,

कंचन को धुप दीप ज्योत जगमगी,
अगर कपूर बाटी भव से धारी,

आरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी

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