Global Statistics

All countries
261,722,074
Confirmed
Updated on November 29, 2021 3:08 AM
All countries
234,585,404
Recovered
Updated on November 29, 2021 3:08 AM
All countries
5,216,565
Deaths
Updated on November 29, 2021 3:08 AM

Global Statistics

All countries
261,722,074
Confirmed
Updated on November 29, 2021 3:08 AM
All countries
234,585,404
Recovered
Updated on November 29, 2021 3:08 AM
All countries
5,216,565
Deaths
Updated on November 29, 2021 3:08 AM

पापंकुशा एकादशी 2021: 16 अक्टूबर को पापंकुशा एकादशी का व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत की विधि

Papankusha Ekadashi Vrat 2021: सनातन धर्म में सभी व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ बताया गया है। प्रत्येक माह में दोनों पक्षों की एकादशी तिथि को एकादशी का व्रत किया जाता है। प्रत्येक एकादशी की तिथि विश्व के पालनहार भगवान हरि विष्णु को समर्पित है। लेकिन प्रत्येक एकादशी की अपनी विशिष्टता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापंकुशा एकादशी कहते हैं। दशमी तिथि के अगले दिन 16 अक्टूबर 2021 शनिवार को पापंकुशा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। लेकिन हर एकादशी की तरह दशमी तिथि से इस एकादशी के नियम भी शुरू हो जाएंगे। तो आइए जानते हैं एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि।

पापकुंशा एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त और व्रत का समय-

आश्विन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 15 अक्टूबर 2021 से शुक्रवार शाम 06.02 बजे से प्रारंभ हो रही है।

अश्वनी मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 16 अक्टूबर 2021 को शनिवार शाम 05.37 बजे समाप्त हो रही है।

पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्ति समय- 17 अक्टूबर 2021 रविवार को शाम 05:39 बजे

एकादशी व्रत का समय – प्रातः 06:23 से प्रातः 08:40 बजे तक

पापंकुशा एकादशी का महत्व-

धार्मिक मान्यता के अनुसार पापकुंशा एकादशी का व्रत नियम और भक्ति से करने से पापों का नाश होता है। और व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति में गुणों का विकास होता है। और कठोर तपस्या करने के समान फल मिलता है।

पापंकुशा एकादशी व्रत पूजन विधि / Papankusha Ekadashi Vrat Puja Vidhi 2021

  • दशमी तिथि को सूर्यास्त से पूर्व सात्विक भोजन ग्रहण करें। सूर्यास्त के पश्चात भोजन नहीं करना चाहिए।
  • पापंकुशा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लेवे।
  • अब पाटे पर कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करें।
  • पानी भरकर पास के कलश की स्थापना करें।
  • अब धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु का तिलक करें।
  • फल-फूल आदि चढ़ाकर विधिपूर्वक पूजा करें।
  • एकादशी महात्म्य की कथा पढ़ें, फिर करें आरती।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि को किसी ब्राह्मण को भोजन और दान देकर व्रत तोड़ें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

RECENT UPDATED