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Sharad Purnima 2022: घर-घर भ्रमण करेंगी मां लक्ष्मी और भगवान कृष्ण रचाएंगे महारास, जाने 10 ख़ास बातें

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Sharad Purnima 2022: शरद पूर्णिमा को कुमार पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन भगवान कृष्ण सभी गोपियों के साथ वृंदावन में महारास लीला रचाते हैं। इसी वजह से वृंदावन में शरद पूर्णिमा पर विशेष आयोजन होते हैं। इसलिए इस महीने की पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Sharad Purnima 2022: इस बार कार्तिक मास की शुरुआत 10 अक्टूबर से हो रही है और उससे पहले रविवार यानी 9 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) सभी पूर्णिमाओं में सबसे खास मानी जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शरद पूर्णिमा आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। शरद पूर्णिमा बेहद खास होती है। इस दिन चंद्रमा की चांदनी पृथ्वी पर अमृत के समान होती है और चंद्रमा पृथ्वी के काफी करीब आ जाता है, जिससे चंद्रमा का आकार बहुत बड़ा दिखाई देता है। इसके अलावा शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा से जुड़ी कुछ खास बातें…

1- हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, दरअसल इस तिथि को देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण कर सबके घर में प्रवेश करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है। जो लोग इस पूर्णिमा पर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की पूजा और मंत्रों का जाप करता हुआ मिलता है मां लक्ष्मी उन पर प्रसन्न होती हैं और वहीं निवास करने लगती हैं।

2- शरद पूर्णिमा के दिन खुले आसमान के नीचे चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी औषधीय गुणों से भरपूर होती है और खीर पर पड़ने से उसमें औषधीय गुण आ जाते हैं।

3- शरद पूर्णिमा की ठंडी चांदनी में खीर रखने का विधान है, खीर में दूध, चीनी और चावल का कारक चंद्रमा भी होता है, इसलिए इनमें चंद्रमा का प्रभाव सबसे अधिक रहता है। जब चंद्रमा की किरणें 3-4 घंटे तक खीर पर पड़ती हैं तो यह खीर अमृत के समान हो जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में लेने से व्यक्ति वर्ष भर स्वस्थ रहता है।

4- शरद पूर्णिमा को कुमार पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन भगवान कृष्ण सभी गोपियों के साथ वृंदावन में महारास लीला करते हैं। इसी वजह से वृंदावन में शरद पूर्णिमा पर विशेष आयोजन होते हैं। इसलिए इस महीने की पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

5- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ था, इसीलिए देश के कई हिस्सों में शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है.

6- नारद पुराण के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में, देवी लक्ष्मी, अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर, अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए निशीथ काल में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है। इसी कारण इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं।

7- शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं के साथ पूरे आसमान में छटा बिखेरता है। इस दिन चांद सभी पूर्णिमाओं की तुलना में सबसे ज्यादा चमकीला और बड़ा दिखाई देता है।

8- शरद पूर्णिमा देवी लक्ष्मी को समर्पित है। शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा होती है। इस दिन मां को अपनी प्रिय वस्तु का भोग लगाकर लक्ष्मी मंत्र का जाप करना शुभ होता है।

9- शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी की पूजा-आराधना के अलावा भगवान शिव, भगवान हनुमान और चंद्रदेव की भी विशेष पूजा और मंत्रोचार करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देते हुए खीर का भोग लगाया जाता है।

10- शरद पूर्णिमा पर कुछ देर के लिए चांदनी रात में बैठकर चांद को खुली आंख से देखना और ध्यान लगाना चाहिए।

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