शीतला अष्टमी 2022: शीतला मां का स्वरूप बीमारियों से बचने का देता है संदेश, जानिए कैसे?

- Advertisement -

Sheetala Ashtami 2022: रंगों के त्योहार के बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला माता की पूजा की जाती है। आम बोलचाल में इसे बसोड़ा भी कहते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से बसोड़ा का पर्व होली के बाद मौसम में बदलाव के लिए तैयार होने का संदेश देता है। स्वास्थ्य की रक्षा के लिए यह सामान्य नियम है कि जब भी मौसम में बदलाव हो तो अपने रहन-सहन और खान-पान में भी उसी के अनुसार बदलाव करना चाहिए, नहीं तो कोई बीमारी आपको जकड़ सकती है। धार्मिक और आयुर्वेद मान्यता के अनुसार इस दिन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए शीतला माता की पूजा की जाती है।

Sheetala Ashtami 2022: स्कंद पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने शीतला माता को ब्रह्मांड को स्वस्थ और रोग मुक्त रखने का कार्य दिया था। यही कारण है कि लोग गर्मी के प्रकोप से बचने और संक्रामक रोगों से मुक्त रहने के लिए शीतला माता की पूजा करते हैं। देवी शीतला स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। ऐसा माना जाता है कि मां की पूजा करने से आंखों के रोग, बुखार, चेचक, कुष्ठ, फोड़े और अन्य त्वचा रोगों से पीड़ित होने पर मां की पूजा करने से न केवल मां की पूजा करने वाले भक्त के परिवार में, यदि कोई इन रोगों से पीड़ित है, तो उसके रोग दूर हो जाते हैं। शीतला माता के रूप के प्रतीकात्मक अर्थ हैं। हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाड़ू) और नीम के पत्ते लिए हुए मां के रूप को दर्शाया गया है।

लाल वस्त्र

इनके कपड़ों का रंग लाल होता है, जो शौर्य, ऊर्जा और सतर्कता का प्रतीक माना जाता है। लाल रंग भी सौभाग्य का प्रतीक है, इसलिए विवाहित महिलाएं शुभ अवसरों पर इस रंग को अधिक पहनती हैं।

गर्दभ (गधा)

गर्दभपर शीतला माता की सवारी। चूंकि यह बहुत ही धैर्यवान जानवर है, इसके माध्यम से देवी का संदेश है कि व्यक्ति को अपने तन और मन को शांत रखते हुए धैर्य से परिश्रम करना चाहिए। इससे सफलता मिलती है और जीवन सुखमय बनता है।

मार्जनी (झाड़ू)

हाथ में मार्जनी होने का मतलब है कि हम सभी को स्वच्छता के प्रति जागरूक होना चाहिए, तभी हम बीमारियों से दूर रह सकते हैं।

सूप

सूप स्वच्छ भोजन करने के लिए प्रेरित करता है, क्योंकि अधिकांश रोग दूषित भोजन खाने से होते हैं।

कलश

कलशमें भरा गंगाजल उनके एक हाथ में उस स्थान को विषाणु मुक्त बनाने के प्रतीक के रूप में है। कलश में सभी तैतीस कोटि देवताओं का वास रहता है। इसलिए इसकी स्थापना-पूजा से घर में समृद्धि आती है।

नीम के पत्ते

इस मौसम में नीम की नई पत्तियों का सेवन करने से कई मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। आप नीम के पत्तों को पानी में मिलाकर स्नान भी कर सकते हैं। यह त्वचा संबंधी कई रोगों को दूर करता है।

यह भी पढ़ें – Chaitra Navratri 2022: कब शुरू हो रही है चैत्र नवरात्रि? जानिए कलश स्थापना विधि और शुभ मुहूर्त

यह भी पढ़ें – चैत्र नवरात्रि 2022:  मां दुर्गा की कृपा के लिए करें ये काम

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Latest Update

Latest Update