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प्रदोष व्रत अक्टूबर 2021: इस दिन सोम प्रदोष व्रत, जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और व्रत की पूरी विधि

Som Pradosh Vrat October 2021: हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दोनों पक्ष। प्रदोष व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस दिन सूर्यास्त से डेढ़ घंटे पहले पूजा शुरू कर दी जाती है। प्रदोष काल के दौरान पूजा का विधान होने के कारण इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत का फल और नाम वार (सप्ताह का दिन) के अनुसार होता है। इस बार आश्विन मास का प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ रहा है। इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। इसलिए सोम प्रदोष व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत व पूजा करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जानिए प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूर्ण पूजा विधि।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व-

सोम प्रदोष का व्रत (Som Pradosh Vrat) करने से भक्तों को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। और उनके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। शिव अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। सौभाग्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। सोमवार को चंद्र ग्रह का दिन माना जाता है। इस दिन शिवलिंग की पूजा करने से चंद्र ग्रह से संबंधित दोष भी समाप्त हो जाते हैं।

प्रदोष व्रत 2021 का दिन और शुभ मुहूर्त

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी का प्रदोष व्रत सोमवार, 04 अक्टूबर 2021 को मनाया जाएगा।

आश्विन मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – 03 अक्टूबर रविवार को रात्रि 10.29 बजे से

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त – 04 अक्टूबर, सोमवार रात 09:05 बजे

सोम प्रदोष पूजा मुहूर्त- 04 अक्टूबर शाम को 06:04 से 08:30 बजे तक।

सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि-

  • सुबह उठकर स्नान करके भगवान शिव के सामने दीपक जलाएं और प्रदोष व्रत का व्रत करें।
  • शाम के समय शुभ मुहूर्त में पूजा प्रारंभ करें।
  • गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • अब सफेद चंदन को शिवलिंग पर लगाएं और बेलपत्र, मदार के फूल, भांग आदि से विधिवत पूजा करें।
  • शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करें और शिव की आरती करें।
  • पूजा स्थल पर आसन पर बैठकर मंत्र जाप या शिव चालीसा का पाठ करें।

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