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दशहरा 2021: विजयदशमी का त्योहार हर जगह विजय दिलाता है, जानिए इस दिन तीन चीजों का महत्व

Vijayadashami 2021: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पूरे देश में दशहरा या विजयदशमी (Vijayadashami) का पर्व जो हर जगह विजय प्रदान करता है। बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धर्म और सत्य की रक्षा की थी। दुर्गा पूजा के दसवें दिन मनाई जाने वाली विजयदशमी (Vijayadashami) सत्य, धर्म और गर्व, अत्याचार और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस साल दशहरा 15 अक्टूबर शुक्रवार को मनाया जाएगा।

दशहरा का त्योहार व्यक्ति को अवगुणों को त्यागने और सर्वोत्तम गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इस दिन सभी के सौभाग्य की कामना के लिए भगवान श्री राम, देवी भगवती, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। ज्योतिष शास्त्र में किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए विजयादशमी को सबसे अच्छा और सबसे शुभ समय माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शुरू किया गया कार्य निश्चित रूप से जीत दिलाएगा। इस दिन बच्चों का अक्षर लेखन, दुकान या घर का निर्माण, गृह प्रवेश, अन्न प्राशन, नामकरण, यज्ञोपवीत संस्कार आदि शुभ कार्य किए जा सकते हैं। लेकिन विजयादशमी के दिन विवाह संस्कार वर्जित माने जाते हैं। विजयदशमी के दिन क्षत्रिय शस्त्र भी पूजा करते हैं।

पान का महत्व

पान को सम्मान, प्रेम और जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद को जलाकर पान के पत्तों का बीना खाने से सत्य की जीत की खुशी का इजहार होता है। विजयादशमी पर हनुमानजी, देवी दुर्गा का आशीर्वाद लेने के लिए पान खाने, खिलाने और चढ़ाने का महत्व है। स्वास्थ्य की दृष्टि से शारदीय नवरात्रि के बाद मौसम में बदलाव के कारण संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से पान के पत्तों के सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है। और संक्रामक रोगों से बचाव होता है।

नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व

नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का एक रूप माना जाता है। रावण पर विजय पाने की इच्छा में श्रीराम ने सबसे पहले नीलकंठ के दर्शन किए। विजयदशमी पर नीलकंठ के दर्शन करने और भगवान शिव से शुभ फल की कामना करने से जीवन में भाग्य, धन और समृद्धि आती है।

शमी वृक्ष पूजा का महत्व

महाभारत काल में पांडवों ने शमी के पेड़ पर अपने हथियार छिपाए थे। जिसके बाद उन्होंने युद्ध में कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। इस दिन शमी की शाखा को घर की पूर्व दिशा में स्थापित कर उसकी विधिवत पूजा कर वृक्ष की पूजा करने से शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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