Global Statistics

All countries
261,673,107
Confirmed
Updated on November 29, 2021 2:08 AM
All countries
234,572,960
Recovered
Updated on November 29, 2021 2:08 AM
All countries
5,216,410
Deaths
Updated on November 29, 2021 2:08 AM

Global Statistics

All countries
261,673,107
Confirmed
Updated on November 29, 2021 2:08 AM
All countries
234,572,960
Recovered
Updated on November 29, 2021 2:08 AM
All countries
5,216,410
Deaths
Updated on November 29, 2021 2:08 AM

करवा चौथ कब है 2021: करवा चौथ पर बन रहे हैं विशेष योग, जानिए पूजा की विधि

करवा चौथ कब है 2021: कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। और चंद्रमा को देखकर व्रत तोड़ा जाता है। इस वर्ष करवा चौथ का पर्व 24 अक्टूबर रविवार को पड़ रहा है। करवा चौथ के इस व्रत को कारक चतुर्थी, दशरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा चौथ व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। करवा चौथ के व्रत में अन्न और जल का त्याग कर दिया जाता है। इसलिए करवा चौथ के व्रत को निर्जला व्रत भी कहा जाता है। विवाहित महिलाएं साल भर इस व्रत का इंतजार करती हैं। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। करवा चौथ व्रत की कथा व पूजन कर इस व्रत को तोड़ती हैं।

करवा चौथ कब है 2021: करवा चौथ व्रत की तिथि

पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रविवार 24 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस चतुर्थी की तिथि को संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा भी की जाती है।

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 24 अक्टूबर प्रातः 3:2 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 25 अक्टूबर से सुबह 5:43 बजे तक
चंद्रोदय का समय: शाम 7:51 बजे

करवा चौथ के दिन विशेष योग

करवा चौथ पर कुछ विशेष योग हैं। वरीयान योग 24 अक्टूबर को रात 11.35 बजे तक रहेगा। वरीयान योग शुभ कार्यों में सफलता प्रदान करता है। इसके साथ ही देर रात 1.02 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा।

करवा चौथ पूजा विधि

  • करवा चौथ के दिन पूजा के लिए घर के उत्तर-पूर्व कोने को अच्छी तरह से साफ करने के बाद एक लकड़ी का पाटा बिछाएं और उस पर शिव, मां गौरी और गणेश जी का चित्र लगाएं। इस प्रकार देवताओं की स्थापना करके उत्तर दिशा में जल से भरा कलश स्थापित करें और उसमें कुछ अक्षत रखें।
  • अब उस पर रोली, अक्षत का टीका लगाएं और कलश के गले में मौली बांध दें। कलश स्थापना के बाद मां गौरी को सिंदूर चढ़ाएं।
  • चार पूरियां और चार लड्डू तीन अलग-अलग जगहों पर लें, एक हिस्सा पानी वाले बर्तन के ऊपर रखें, दूसरा हिस्सा मिट्टी या चीनी के करवा पर रखें और तीसरा हिस्सा उनकी साड़ी या चुनरी के पल्ले में पूजा के समय बांध दें। अब देवी मां के सामने घी का दीपक जलाएं और उनकी कथा पढ़ें।
  • इस तरह पूजा के बाद अपनी साड़ी में रखे प्रसाद और करवा पर रखे प्रसाद को अपने पुत्र या अपने पति को खिलाएं और कलश पर रखे प्रसाद को गाय को खिलाएं।
  • बचे हुए जल से भरे कलश को पूजा स्थल पर रखें। रात को जब चन्द्रमा उदय हो तो इस कलश के जल से चन्द्रमा को अर्घ्य दें और घर में जो कुछ भी तैयार हो उसे अर्पित करें। इसके बाद व्रत तोड़ें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

RECENT UPDATED